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नई गतिविधियाँ (New Activities)

 

 

1. कुलगीत की रचना

2. कम्प्यूटर सेण्टर की स्थापना

3. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा

4. स्नातकोत्तर विभागों, अधिषत्कक्ष, पुस्तकालय तथा छात्रमनोरंजन केन्द्र को उपस्करों से सुसज्जित करना

5. चित्रकला, मूर्तिकला, संगीत एवं नाट्य विषयक व्यावसायिक पाठ्यक्रम का संचालन

6. स्नातकोत्तर छात्रावास संख्या 1 एवं 2 की मरम्मती और स्नाकोत्तर छात्रावास संख्या 3 का जीर्णोद्धार कार्य

7. ग्यारहवीं पञ्चवर्षीय योजना में यू.जी..सी. से प्राप्तव्य अनुदान से निम्नलिखित विकासात्मक कार्य प्रारम्भ करने की हमारी योजना है

8. ग्यारहवीं पञ्चवर्षीय योजना में विश्वविद्यालय में प्रेस की स्थापना

9. स्टेडियम निर्माण की योजना

 

1. कुलगीत की रचना -

महामहिम कुलाधिपति की अध्यक्षता में 05.01.2007 दिवसीय कुलपतियों की बैठक में लिये गये निर्णय तथा राज्यपाल सचिवालय के पत्राक बी.एस.यू. 32/2006-476/जी.एस.(1) दिनांक 02.02.2007 के द्वारा संसूचित निर्णय के आलोक में इस विश्वविद्यालय के कुलगीत की रचना कर ली गई है। संस्कृत भाषा में निर्मित यह गीत विश्वविद्यालय की मुद्रा में अंकित चित्र पर आधारित है। इस गीत की रचना स्नातकोत्तर व्याकरणविभाग के सेवानिवृत्त प्राचार्य तथा विभागाध्यक्ष स्व॰ कृष्णानन्द झा ने की थी। यह गीत मिथिला के प्रसिद्ध महाकवि कविकोकिल विद्यापति के लोकप्रसिद्ध गीत ‘‘ जय जय भैरवि असुर भयावनि’’ की तर्ज पर बनाया गया है। महामहिम कुलाधिपति के अनुमोदन के पश्चात् इस विश्वविद्यालय का यह अपना कुलगीत हो गया है, जिसका गायन विश्वविद्यालय मुख्यालय और इसके महाविद्यालयों में आयोजित होने वाले विशेष समारोह के अवसर पर कर्तव्य है। कुलगीत का स्वरूप निम्नलिखित है - जय जय भगवति हे सुरभारति दरभंगा सुनिवासे । कृतकामेश्वरविश्व-सुविद्यालयसौभाग्यविकासे ।। 1 ।। (ध्रु. प.) जय कामेश्वरसिंह-यशोधवलीकृत-चिन्मयदेहे । जनकनन्दिनीजन्म-सुपावन-मिथिलामञ्जुलगेहे ।। 2 ।। जय जय.....।। कृतहिमगिरिभूषित-भारतभूपिप्पल-खगयुगयोगे । आगम-निगम-निरूपितदर्शन-दर्शितयोगवियोगे ।। 3। । परतः स्वतः प्रमाणविवेचन-विश्रुतबुधवरशाले । मीनसलिल-विलसत्सरसीरुह-वीणापुस्तकमाले ।। 4 ।। जय जय..... ।। गौतम-कपिल- कुमारिल-मण्डन-रचित-सुदर्शनसारे । गुरुरवि-बोधितविश्वव्यापक-विद्यावरविस्तारे ।। 5 ।। जय जय..... ।।

2. कम्प्यूटर सेण्टर की स्थापना -

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की वित्तीय सहायता से विश्वविद्यालय मुख्यालय में कम्प्यूटर सेण्टर की स्थापना का कार्य अन्तिम चरण में हैं। कम्प्यूटर कक्ष का निमार्ण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। विक्रेताओं को हार्डवेयर की आपूर्ति तथा सॉफ्टवेयर निर्माण के लिए क्रय समिति के निर्णयानुसार कार्यालय आदेश भी दिये जा चुके हैं। इस कम्प्यूटर सेण्टर के माध्यम से परीक्षा विभाग, लेखा शाखा और स्थापना शाखा के कार्यो को कम्प्यूटरीकृत करने की कार्यवाही अन्तिम चरण में है। इसी सेण्टर के माध्यम से विश्वविद्यालय मुख्यालय तथा महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों, पदाधिकारियों और कर्मचारियों के साथ-साथ सामान्य नागरिकों के लिए भी कम्प्यूटर प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जाएगा। यह कार्यक्रम स्ववित्तपोषित होगा, लेकिन इस विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर विभागों तथा महाविद्यालयों में अध्ययनरत छात्रों को कम्प्यूटर का प्रशिक्षण निःशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। यह पाठ्यक्रम तीन माह का होगा और सम्पूर्ण पाठ्यक्रम का शुल्क 1500/-रु. होगा। प्रशिक्षण समाप्ति के बाद विश्वविद्यालय द्वारा ली जाने वाली परीक्षा में उत्तीर्ण सफल प्रशिक्षित को प्रमाणपत्र भी प्रदान किया जाएगा।

3. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा -

महामहिम कुलाधिपति महोदय के निर्देशानुसार तत्काल विश्वविद्यालय मुख्यालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की व्यवस्था करने की हमारी योजना है। इस कार्य में एनआईसी का भी सहयोग प्राप्त किया जाएगा। बाद में इसका विस्तार महाविद्यालयों में भी किया जाएगा। इस सुविधा के बाद मुख्यालय में विशिष्ट विद्वानों के व्याख्यानों से महाविद्यालयों में उपस्थित छात्र और शिक्षक भी लाभान्वित हो सकेंगे। साथ ही विश्वविद्यालय प्रशासन का सीधा सम्पर्क महाविद्यालयों, राज्य सरकार, कुलाधिपति सचिवालय तथा अन्य विश्वविद्यालयों से सुलभ हो जाएगा।

 

4. स्नातकोत्तर विभागों, अधिषत्कक्ष, पुस्तकालय तथा छात्रमनोरंजन केन्द्र को उपस्करों से सुसज्जित करना - स्नातकोत्तर विभागों के उपस्कर बहुत पुराने हो जाने के कारण अधिकतर उपस्कर बैठने लायक नहीं रह गये हैं। इस मद में राशि अनुपलब्धता के कारण पुराने जीर्ण-शीर्ण उपस्करों का उपयोग करने को हम विवश हैं। स्नातकोत्तर विभागों में उपस्करों की कमी के कारण हम अपनी परीक्षाओं के संचालन में भी प्रायः असमर्थ हो जाते हैं। अधिषत्कक्ष में उपस्कर की व्यवस्था न रहने के कारण सीनेट आदि की बैठकों में हमें भाड़े के उपस्करों पर ही निर्भर रहना पड़ता है। यही स्थिति केन्द्रीय पुस्तकालय के वाचनालय और छात्रमनोरंजन केन्द्र की भी है। इस समस्या का समाधान करने का अवसर हमें विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से दशवीं पंचवर्षीय योजना के अन्त में 30.59 लाख रुपये की राशि की प्राप्ति के कारण मिला है। इस राशि का उपयोग 25 साल पुराने भवनों की मरम्मत करने और उपस्करों के क्रय करने हेतु विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का निर्देश प्राप्त है। इसी राशि में से 25 साल से अधिक पुराने कुछ भवनों की मरम्मती पर खर्च करने के साथ-साथ स्नातकोत्तर विभागों, अधिषत्कक्ष, पुस्तकालय तथा छात्रमनोरंजन केन्द्र को उपस्कारों से सुसज्जित करने का निर्णय लिया गया है। इसके अतिरिक्त इस राशि से कुछ आवश्यक शैक्षणिक उपकरण और आलमीरा आदि पर भी व्यय करने का निर्णय लिया गया है। इन सारे कार्यों को शीघ्र पूरा कर लेने की कार्यवाही प्रगति पर है।

5. चित्रकला, मूर्तिकला, संगीत एवं नाट्य विषयक व्यावसायिक पाठ्यक्रम का संचालन -

18.5.2005 दिवसीय अभिषद् के निर्णयानुसार विश्वविद्यालय द्वारा सितम्बर 2005 में चित्रकला, मूर्तिकला, संगीत एवं नाट्य विषयक स्नातक, स्नातकोत्तर, एक वर्षीय डिप्लोमा एवं 6 माह वाले प्रमाणपत्र से सम्बन्धित विविध व्यावसायिक पाठ्यक्रम के संचालन हेतु मानव संसाधन विभाग (उच्च शिक्षा), बिहार सरकार से अनापत्ति प्रमाण पत्र देने का अनुरोध किया गया था। विश्वविद्यालय के अनुरोध को स्वीकार कर बिहार सरकार शिक्षा विभाग के पत्रांक-2/एम/-89/2005 उ0 शि0 2989 दिनांक 29.11.2005 के द्वारा अनापत्ति प्रमाण पत्र विश्वविद्यालय को प्राप्त हो गया है। पाठ्यक्रम संचालन के लिए प्रवेश अध्यादेश, पाठ्यक्रम नियमावली और परीक्षा नियमावली का संशोधित प्रारूप तैयार कर लिया गया है, जिसे 28.09.2007 दिवसीय विद्वतपरिषद् द्वारा अनुमोदित भी कर दिया गया है। अधिषद् की स्वीकृति के बाद महामहिम कुलाधिपति के पास अनुमोदनार्थ प्रेषित करने के पश्चात् इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश तथा शिक्षकों आदि की व्यवस्था के लिए अग्रिम कार्यवाही शीघ्र प्रारम्भ कर दी जाएगी। ये पाठ्यक्रम स्ववित्तपोषित योजनान्तर्गत होंगे।

 

6. स्नातकोत्तर छात्रावास संख्या 1 एवं 2 की मरम्मती और स्नाकोत्तर छात्रावास संख्या 3 का जीर्णोद्धार कार्य -

यू॰जी॰सी॰ से दशवीं पञ्चवर्षीय योजना के अन्त में विविध मद के लिए प्राप्त राशि 30.59 लाख रुपये में से स्नातकोत्तर छात्रावास संख्या 1 एवं 2 की मरम्मती का कार्य हो चुका है। स्नातकोत्तर छात्रावास संखा-3 के जीर्णोद्धार कार्य के लिए राज्य सरकार के कॉरफस फण्ड से प्राप्त 7.00 लाख रुपये से इस छात्रावास के जीर्णोद्धार का कार्य संवेदक द्वारा किया जा रहा है।

7. ग्यारहवीं पञ्चवर्षीय योजना में यू.जी..सी. से प्राप्तव्य अनुदान से निम्नलिखित विकासात्मक कार्य प्रारम्भ करने की हमारी योजना है -

(क)निर्माण कार्य

1. शिक्षाशास्त्र भवन। 2. ललितकला, संगीत एवं नाट्यकला भवन। 3. प्राचार्य आवास। 4. उपाचार्य आवास 5. प्रतिकुलपति आवास। 6. कुलसचिव आवास। 7. बहुद्देशीय भवन। 8. तृतीय एवं चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी आवास। 9. राष्ट्रीय सेवा योजना भवन। 10. प्रशासनिक भवन (द्वितीय खंड) 11. विश्वविद्यालय मुख्यालय तथा कुलपति आवास तथा अतिथि निवास को जोड़ने के लिए पुल का निर्माण।

(ख) जीर्णोद्धार एवं मरम्मती कार्य

1. कामेश्वरसदनम्। 2. परिसर स्थित कर्मचारी आवास। 3. बंगलागढ़ मोहल्ला स्थित मनोहर निकुञ्ज भवन।

(ग) परिसर हेतु चहारदिवारी

1. 100 मीटर ग् 2 मीटर की परिमाप में कार्य सम्पन्न कर लिया गया है।

(घ) तकनीकी शिक्षा

1. कम्प्यूटर प्रशिक्षण के लिए एक वर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम 2. कम्प्यूटर संचालन के सामान्य ज्ञान के लिए त्रिमासीय प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम। 3. योगशिक्षा का डिप्लोमा पाठ्यक्रम। 4. वास्तुशास्त्र का डिप्लोमा पाठ्यक्रम।

(ङ) स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए न्यूनतम अपेक्षित पदों की व्यवस्था -

प्रत्येक स्नातकोत्तर विभाग के लिए शिक्षकों के न्यूनतम अपेक्षित 6 पदों (प्राचार्य-1, उपाचार्य-2, व्याख्याता-3) के मापदण्ड को पूरा करने के लिए जिस विभाग में मापदण्ड के अनुसार जितने कम पद स्वीकृत हैं, उस विभाग में उतने पद की व्यवस्था करने की हमारी योजना प्रक्रियारत है।

(च) प्रस्तावित तकनीकी शिक्षा के लिए पदों की व्यवस्था - 1. कम्प्यूटर के डिप्लोमा एवं प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम के लिए प्रशिक्षकों के - 5 पद 2. योग प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के लिए प्रशिक्षकों के - 4 पद 3. वास्तुशास्त्र डिप्लोमा पाठ्यक्रम के लिए शिक्षकों के - 4 पद

8. ग्यारहवीं पञ्चवर्षीय योजना में विश्वविद्यालय में प्रेस की स्थापना -

विश्वविद्यालय में ग्रन्थ प्रकाशन एवम् अन्य प्रकाशनों के निमित्त एक प्रेस स्थापित करने की भी हमारी योजना है। इस प्रेस का उपयोग जनसाधरण/किसी अन्य संस्था से प्रकाशन के लिए प्राप्त आदेश से उनका भी प्रकाशन कार्य करने में किया जाएगा, ताकि यह प्रेस विश्वविद्यालय के लिए आय का भी एक साधन बन सके। एतदर्थ यू.जी.सी. से आधारभूत सुविधा हेतु अपेक्षित राशि की माँग के साथ-साथ निम्नलिखित पदों की स्वीकृति का अनुरोध भी राज्य सरकार और यू.जी.सी. से किया जाएगा।

1. प्रेस मैनेजर 2. कम्पोजिटर 3. प्रूफ रीडर 4. मशीन ऑपरेटर

 

आपदा प्रबन्धन तथा Philosophy Of Communal Harmony And Social Peace विषयों में डिप्लोमा :- प्रारम्भ करने की योजना

यू.जी.सी. के पत्र के अनुसार 28.09.2007 दिवसीय विद्वतपरिषद् के आलोक में आपदा प्रबन्धन तथा

Philosophy Of Communal Harmony And Social Peace इन दो विषयों में डिप्लोमा पाठ्यक्रम प्रारम्भ करने पर प्रशासनिक स्तर पर विचार किया जा रहा है|

9. स्टेडियम निर्माण की योजना -

स्टेडियम निर्माण के लिए दिनांक 02.07.2006 को बिहार सरकार के माननीय खेल मंत्री जनार्दन सिंह सिग्रीवाल के करकमलों से शिलान्यास किया जा चुका है। इसके नक्शे और प्राक्कलन की स्वीकृति की कार्यवाही चल रही है। नक्शे एवं प्राक्कलन की स्वीकृति के बाद इसके निर्माण की अगली प्रक्रिया निकट भविष्य में शुरू कर दी जाएगी। संस्कृतविश्वविद्यालय दरभंगा (बिहार) का लक्ष्य भारत ही नहीं सम्पूर्ण विश्व की धरोहर संस्कृत, प्राकृत तथा पालि भाषा और इन भाषाओं में उपलब्ध ज्ञान-विज्ञान के असीम भण्डार को संरक्षित करना, अध्ययन-अध्यापन के द्वारा, राष्ट्रिय-अन्तरराष्ट्रिय संगोष्ठी तथा कार्यशाला के माध्यम से और इन भाषाओं के प्राचीन तथा आधुनिक ग्रन्थों के प्रकाशन के द्वारा प्रचार-प्रसार करना और उन्हें आज की आवश्यकता के रूप में प्रस्तुत करना।

 

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